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समस्तीपुर में जमीन बना खून का खेल, भू-माफिया गैंग की गोलियों से दहशत, डीलरों की हिट-लिस्ट से कांप रहा जिला

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समस्तीपुर में जमीन कारोबार से जुड़ी लगातार फायरिंग और हत्याओं की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि भू-माफियाओं का नेटवर्क अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है। यदि समय रहते सख्त और निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रवृत्ति कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।समस्तीपुर में जमीन का कारोबार अब पूरी तरह खूनी संघर्ष में बदलता जा रहा है। यहां भू-माफियाओं का संगठित नेटवर्क पहले साफ जमीन को फर्जी कागजात और दबंगई के दम पर विवादित बनाता है, फिर मालिकों को धमकाकर औने-पौने दाम में खरीद लेता है और कब्जा कर उसी जमीन को दो-तीन गुना कीमत पर बेच देता है। विरोध करने वालों को सीधे गोलियों से चुप कराने का सिलसिला तेजी से बढ़ा है, जिससे जिले में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है। हाल के दिनों में चर्चित डीलर अंट्टू ईस्सर पर ताबड़तोड़ फायरिंग, दिनदहाड़े गणेश सहनी की हत्या, दो अन्य प्रॉपर्टी डीलरों को मारने की साजिश, बाउंड्री विवाद में गोलीबारी, हथियारबंद बदमाशों द्वारा जेसीबी से मकान तोड़ने जैसी घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि जमीन का धंधा अब अपराध उद्योग में बदल चुका है। इससे पहले भी जिले में कई सनसनीखेज वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें घर में घुसकर गोलियों से भून देना, डबल मर्डर, कारोबारी पर बार-बार जानलेवा हमले जैसी घटनाएं शामिल हैं, जिनके पीछे जमीन वर्चस्व की लड़ाई ही मुख्य वजह रही। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि फरार अपराधियों द्वारा सोशल मीडिया पर खुलेआम धमकी भरे पोस्ट कर नए टारगेट की बात लिखे जाने की चर्चा है, जिससे लोगों में दहशत और बढ़ गई है। लगातार घटनाओं के बावजूद कई मामलों में मुख्य आरोपी फरार हैं और पुलिस को अब तक ठोस सफलता नहीं मिली है, जिस कारण पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले जिस तरह टेंडर को लेकर गैंगवार होती थी, अब वही हाल जमीन कारोबार का हो गया है और अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जिला पूरी तरह गैंगवार की आग में झुलस सकता है, जहां जमीन की कीमत से ज्यादा इंसानी जान सस्ती हो जाएगी।

संपादकीय: जमीन का कारोबार या खून का खेल बनता समस्तीपुर?
जिले में जिस तरह जमीन से जुड़े विवाद लगातार गोलियों, हत्याओं और साजिशों में बदलते जा रहे हैं, वह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। जमीन, जो कभी सुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक मानी जाती थी, आज भय, दबंगई और अपराध की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। यह बेहद चिंताजनक है कि साफ-सुथरी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से पहले विवादित बनाया जाता है, फिर कमजोर मालिकों को धमकाकर कब्जा कर लिया जाता है और अंततः उसी जमीन को मुनाफे के लिए बेचा जाता है। यह प्रवृत्ति बताती है कि अपराध अब अवसर नहीं बल्कि व्यवस्थित उद्योग का रूप ले चुका है। हाल की घटनाओं की श्रृंखला यह साबित करती है कि अपराधियों के मन में कानून का डर घटा है और आम लोगों का भरोसा भी डगमगा रहा है। जब हत्या, फायरिंग और धमकी जैसे गंभीर अपराधों में आरोपी लंबे समय तक गिरफ्त से बाहर रहते हैं, तो यह स्थिति अपराधियों के मनोबल को बढ़ाती है और समाज में भय का वातावरण गहरा करती है। सबसे खतरनाक पहलू यह है कि अब अपराधी खुलेआम सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियां दे रहे हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है। यह सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रशासनिक समन्वय, राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी प्रश्न है। जमीन विवादों के त्वरित समाधान, कागजी प्रक्रिया की डिजिटल पारदर्शिता और संगठित अपराध पर कठोर कार्रवाई के बिना हालात नियंत्रित करना कठिन होगा। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो जमीन का यह कारोबार आने वाले दिनों में संगठित गैंगवार में बदल सकता है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा। अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी ठोस व्यवस्था बनाने की है जो यह संदेश दे सके कि जमीन पर कब्जा नहीं, कानून का राज चलता है।

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